Share:

सुशीला देवी: Newspaper Waste से Global Eco Brand तक

कई कहानियाँ पढ़कर हम प्रेरित होते हैं,
कुछ कहानियाँ हमें सोचने पर मजबूर करती हैं,
लेकिन सुशीला देवी की कहानी
समाज की सोच बदल देती है।

राजस्थान के झालावाड़ के छोटे से गांव असनावर में रहने वाली इस महिला ने वही चीज़ उठाई, जिसे लोग कचरा समझकर फेंक देते हैं — पुराना अख़बार — और उससे ऐसा नवाचार किया जिसकी गूंज अब अमेरिका तक सुनाई देती है।

यह सिर्फ उद्यमिता की कहानी नहीं,
बल्कि यह अहिंसा, पर्यावरण संरक्षण, महिला-सशक्तिकरण और जैन दर्शन से प्रेरित जीवन-शैली का उदाहरण है।

संघर्ष की शुरुआत: जब मजबूरी ने दिशा दी

17 साल पहले सुशीला देवी के सामने जिंदगी जैसे ठहर गई थी। पति के निधन के बाद पाँच बच्चों की ज़िम्मेदारी और आर्थिक अस्थिरता के कारण वह गहरे अंधकार में थीं। समाज ने कहा:

“इतनी बड़ी जिम्मेदारियाँ… एक महिला अकेले क्या कर पाएगी?”

लेकिन प्रेरणा वहीं जन्म लेती है जहाँ चुनौतियाँ सबसे ज्यादा हों।

सीखने की यात्रा: एक-एक कौशल से उम्मीद की रोशनी

उन्होंने हार नहीं मानी। आसपास चल रही ट्रेनिंग में शामिल हुईं:

  • हथकरघा बुनाई

  • सिलाई

  • ब्लॉक प्रिंटिंग

  • फैब्रिक डिजाइन

उन्होंने कपड़े बुनना तो सीख लिया, लेकिन उनके दिमाग में एक सवाल घूम रहा था:

“क्या सिर्फ धागे और कपड़े ही बुने जा सकते हैं? क्या waste कभी उपयोग में आ सकता है?”

वो विचार जिसने इतिहास बदल दिया

एक दिन अखबार देखते हुए मन में विचार आया:
“अगर इसके स्ट्रिप्स बनाकर धागे की तरह बुना जाए तो?”

और यह विचार एक आविष्कार बन गया।

उन्होंने:

  • अख़बारों को स्ट्रिप्स में काटा

  • उसे धागे के साथ मिलाया

  • हाथकरघे पर बुनना शुरू किया

नतीजा?

  • लैपटॉप बैग

  • टो बैग

  • ज्वेलरी पाउच

  • गिफ्ट पैक

  • शगुन लिफ़ाफ़े

और यह सब eco-friendly, cruelty-free, sustainable और 100% handmade

जुनून, जज़्बा और ज़मीन से जुड़ा नवाचार

मूल्यउनके काम में कैसे दिखाई देता है
रचनात्मकतापुराने अख़बार जैसे साधारण पदार्थ को खूबसूरत, उपयोगी और टिकाऊ उत्पादों में बदलना
धैर्य और मेहनतहर बैग, पाउच और फैब्रिक हाथों से महीनों की साधना के बाद तैयार होता है — बिना किसी मशीन की जल्दबाज़ी के
सतत विकास (Sustainability)पर्यावरण, संसाधनों और आने वाली पीढ़ियों को ध्यान में रखते हुए पूरी प्रक्रिया Eco-friendly
समुदाय और सहयोग50 महिलाओं को प्रशिक्षण, रोज़गार और आत्मसम्मान देकर सामूहिक प्रगति की मिसाल बनना

यह सिर्फ एक व्यापारिक मॉडल नहीं—
बल्कि एक सोच है:

“जहाँ कचरे में भी भविष्य दिखे, और हर हाथ को कौशल के साथ सम्मान भी मिले।”

उनके लिए यह सिर्फ व्यापार नहीं, बल्कि मानवीय और आध्यात्मिक अभ्यास है।

आत्मनिर्भरता से सामूहिक शक्ति तक

  • शुरुआत में पूँजी की कमी थी। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं छोड़ी।

  • महिलाओं ने मिलकर छोटी-छोटी रकम बचानी शुरू की

  • जहाँ ₹1 जमा करना था, उन्होंने ₹4 जमा किए

  • बैंक ने विश्वास दिखाया

  • और Jhalrapatan Self Help Group की पहली इकाई शुरू हुई

आज:

  • 50 महिलाएँ यहाँ काम कर रही हैं

  • हर महिला अपनी आय से बच्चों की पढ़ाई, घर और भविष्य संवार रही है

  • यह परियोजना ग्रामीण महिला उद्यमिता का बेहतरीन मॉडल बन चुकी है

अमेरिका में बढ़ती मांग — क्यों?

सुशीला देवी के उत्पादों की खासियत:

  • 100% handmade

  • Recycled materials

  • Chemical-free natural dyes

  • Unique handloom texture

  • Ethical and sustainable workflow

आज वह हर महीने:

₹5–6 लाख के ऑर्डर अमेरिका भेजती हैं।
ग्राहक इन्हें eco luxury products मानते हैं — gifting के लिए खासकर high demand में।

उनके उत्पाद कहाँ मिलते हैं?

Amrita Haat, Bharatpur में उनके stalls पर

  • हैंडब्लॉक फैब्रिक

  • बेडशीट

  • क्विल्ट

  • हैंडमेड बैग

  • जैकेट

  • तौलिए

₹50 से ₹2500 तक की रेंज में बिकते हैं और
हर दिन ₹10,000–20,000 की बिक्री होती है।

ऑनलाइन ऑर्डर कैसे करें?

(कहानी आधारित उपलब्ध जानकारियों पर आधारित संभावित customer process)

(यदि भविष्य में उनकी official website या catalog link उपलब्ध हो, तो उसे आगे जोड़ा जा सकता है।)

आज वही लोग गर्व करते हैं जिन्होंने कभी सवाल किया था

जो कभी कहते थे:

“काम छोड़ दो… ये सब किसी काम का नहीं।”

आज कहते हैं:

“ये हमारी सुशीला है — जिसने गांव का नाम दुनिया में पहुँचा दिया।”

निष्कर्ष: यह सिर्फ व्यापार नहीं — आंदोलन है

सुशीला देवी की कहानी हमें यह सिखाती है:

  • कचरा भी संसाधन बन सकता है

  • सीखना कभी व्यर्थ नहीं जाता

  • एक महिला की शक्ति समाज बदल सकती है

  • अहिंसक नवाचार ही भविष्य है

Also Read: https://jinspirex.com/indigo-how-to-make-your-journey-stress-free-after-the-new-flight-rules/

Discover More Blogs

Choosing the right engineering branch, finding the best college, and ensuring that you genuinely enjoy your engineering journey are questions that every aspiring engineer faces. Many students often wonder—“Which engineering branch suits me best?”, “How do I secure admission in

324 views

क्या प्रकृति हमें हर दिन कुछ सिखा रही है? क्या हम कभी रुककर यह सोचते हैं कि जिस प्रकृति के बीच हम रोज़ जीते हैं, वह हमें क्या सिखा रही है?पेड़ों को देखना आसान है, लेकिन क्या हम यह समझते

332 views

अहमदाबाद प्लेन क्रैश: 12 जून 2025 को अहमदाबाद से सामने आई विमान दुर्घटना की खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया। कुछ ही पलों में कई जिंदगियां समाप्त हो गईं, परिवार टूट गए और अनेक मासूम सपने अधूरे रह गए।

467 views

गणतंत्र दिवस: उत्सव से आगे एक पहचान गणतंत्र दिवस भारत का सबसे बड़ा राष्ट्रीय पर्व है।यह सिर्फ परेड, झंडे और आसमान में उड़ते फाइटर जेट्स का दिन नहीं होता। यह दिन हमें याद दिलाता है कि हम एक देश के

363 views

जन औषधि: आज के समय में दवाइयों का खर्च कई परिवारों के लिए चिंता का कारण बन गया है।कई लोग बिना जानकारी के दवा खरीद लेते हैं। बाद में पता चलता है कि वही दवा कहीं और काफी सस्ती मिल

341 views

Women’s Day: क्या आपने कभी सोचा है कि जीवन के सबसे बड़े सबक हमें कहाँ से मिलते हैं? किताबों से? अनुभव से? या किसी महान व्यक्ति से? सच यह है कि कई बार जीवन की सबसे गहरी सीख हमें हमारे

257 views

Latest Article

Lorem ipsum dolor sit amet, consectetur adipiscing elit. Ut elit tellus, luctus nec ullamcorper mattis, pulvinar dapibus leo.