Refined Sugar: हम में से ज़्यादातर लोग रोज़ाना चाय, मिठाई या desserts में चीनी डालते हैं —
लेकिन कम ही लोग पूछते हैं:
इतनी चमकदार सफ़ेद चीनी बनती कैसे है?
और जब packet पर लिखा होता है:
Refined Sugar
तो दिमाग में यही आता है —
शायद यह “ज़्यादा साफ़” और “ज़्यादा pure” होगी।
लेकिन क्या सचमुच ऐसा है?
या फिर इस शब्द के पीछे कुछ ऐसा छुपा है, जिसके बारे में हमें बताया नहीं जाता?
आइए step-by-step समझते हैं।
Refined Sugar — “Refined” असल में होता क्या है?
सरल भाषा में:
Refining = कच्ची चीनी (raw/brown) को कई processes से गुज़ारकर पूरी तरह सफ़ेद बनाना।
इसमें आमतौर पर:
- गन्ने का रस उबाला जाता है
- crystals बनाए जाते हैं
- फिर उन crystals को बार-बार
- साफ़ किया जाता है
- filter किया जाता है
- bleach / whiten किया जाता है
- साफ़ किया जाता है
मकसद सिर्फ एक:
रंग हटे — और चीनी सुंदर, चमकदार और market-friendly दिखे।
यानी जो चीनी जितनी सफ़ेद दिखती है,
वह उतनी ही ज्यादा process की गई होती है।
Refined Sugar इतनी popular क्यों है?
क्योंकि:
देखने में attractive
baking और packaged foods के लिए perfect
consumers को “premium” लगती है
लेकिन “white = pure”
यह हमेशा सच नहीं होता।
Refining का सबसे विवादित हिस्सा — Bone Char
यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है।
कुछ industries में, चीनी को extra सफ़ेद बनाने के लिए:
Bone Char नाम का filter इस्तेमाल होता है।
Bone Char क्या है?
यह जानवरों की जली हुई हड्डियों से बना carbon-like powder होता है।
इसका काम:
- रंग सोख लेना
- चीनी को और ज्यादा सफ़ेद बना देना
महत्वपूर्ण बात:
चीनी सीधे हड्डियों से नहीं बनती —
लेकिन सफ़ेदी का process bone char से होकर गुजर सकता है।
और यह जानकारी अक्सर packet पर लिखी नहीं होती।
ध्यान रखें:
हर कंपनी और हर देश में bone char use नहीं होता।
कई जगह alternatives भी इस्तेमाल होते हैं।
समस्या यह है कि:
उपभोक्ता को clear information rarely दी जाती है।
क्या Refined Sugar “vegetarian” मानी जा सकती है?
तकनीकी तौर पर:
- bone char final चीनी में मौजूद नहीं रहता
- यह सिर्फ filtering material है
लेकिन कई लोगों के लिए सवाल अलग है:
यदि process में animal-derived filters use हुए —
तो क्या इसे सच में pure कहा जा सकता है?
इसलिए बहुत से लोग refined sugar के बजाय
कम-processed विकल्प पसंद करते हैं।
Health Angle — शरीर पर क्या असर?
Refining के दौरान:
- natural minerals हट जाते हैं
- fiber शून्य होता है
- सिर्फ “empty calories” बचती हैं
नतीजा:
blood sugar जल्दी spike
cravings बढ़ती हैं
long-term lifestyle diseases का खतरा
सरल शब्दों में:
जितनी ज्यादा refining — उतना कम nutritional value
Label पढ़ना क्यों जरूरी है?
ज़्यादातर packets पर बस लिखा होता है:
Refined Sugar
लेकिन rarely बताया जाता है:
- filtering किससे हुआ?
- process कितना natural या synthetic था?
यानी हम अक्सर:
जानकारी के बिना खरीद लेते हैं।
जबकि हमें जानने का हक है।
तो फिर करना क्या चाहिए? (Practical Guide)
1. Bone-Char-Free / Unrefined विकल्प देखें
जब label देखें, तो इन terms पर ध्यान दें:
- Raw Sugar
- Unrefined Sugar
- Organic Sugar
- Sulphurless Sugar
- Cane Sugar (natural)
https://www.peta.org/faq/are-animal-ingredients-included-in-white-sugar/
Note:
कभी-कभी “brown sugar” सिर्फ रंग मिलाकर भी बनती है —
इसलिए brand और source भरोसेमंद होना चाहिए।
2. Better Alternatives अपनाएँ
- गुड़ (Jaggery)
- मिश्री
- Khandsari
- Natural cane sugar
इनमें आम तौर पर:
कम processing
कुछ minerals रहते हैं
refining steps comparatively कम होते हैं
(लेकिन moderation हमेशा ज़रूरी है।)
3. Companies से पूछिए — यह आपका अधिकार है
Customer care / email पर simple सवाल पूछें:
“क्या आपकी sugar bone-char-free है?”
ज्यादा लोग पूछेंगे —
तो कंपनियाँ ज्यादा transparent होंगी।
Myths vs Reality
| Myth | Reality |
| Refined sugar हमेशा pure होती है | Refined sugar ज्यादा processed होती है |
| Bone char चीनी का हिस्सा बनती है | यह filter की तरह use होती है |
| Brown sugar हमेशा natural | कई बार बस color-added refined sugar |
| हमें जानकारी नहीं मिल सकती | Companies से पूछना पूरी तरह possible है |
Refined Sugar — “शुद्ध” या सिर्फ “ज़्यादा सफ़ेद”?
अब जब आप अगली बार sugar packet उठाएँगे,
तो शायद यह सवाल याद आएगा:
मैं जो चुन रहा हूँ — वह सच में clean है,
या बस देखने में साफ़ दिख रहा है?
और यही awareness —
हमारी everyday choices को बदल सकती है।
अंतिम बात: छोटी जानकारी, बड़ा फर्क
हम जो खाते-पीते हैं,
वह सिर्फ स्वाद नहीं — एक पूरी journey लेकर आता है।
अगर हम उसका process समझने लगें:
healthier options चुनेंगे
unnecessary processing से बचेंगे
बच्चों को भी जागरूक choices सिखा पाएँगे
और यही बदलाव —
धीरे-धीरे हमारी kitchen, habits और lifestyle में दिखने लगता है।
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