Makar Sankranti: सर्दियों की धूप, आसमान में उड़ती पतंगें और रसोई से आती तिल–गुड़ की खुशबू — यही है मकर संक्रांति।
यह त्योहार सिर्फ मिठाई खाने या परंपरा निभाने का दिन नहीं, बल्कि प्रकृति, विज्ञान और जीवनशैली को समझने का अवसर है।
मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि जैसे सूर्य अपनी दिशा बदलता है, वैसे ही हमें भी अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने चाहिए — भोजन में, सोच में और व्यवहार में।
मकर संक्रांति 2026: इस लेख में आप जानेंगे:
- मकर संक्रांति क्या है और क्यों मनाई जाती है
- उत्तरायण और सूर्य का वैज्ञानिक महत्व
- तिल–गुड़ क्यों खाया जाता है (विज्ञान + परंपरा)
- मकर संक्रांति पर बनने वाली सिर्फ तिल–गुड़ से बनी सात्विक रेसिपीज़
- इस त्योहार से जुड़ा प्रेरणादायक जीवन संदेश
Makar sankranti kab hai 2026: मकर संक्रांति क्या है और क्यों मनाई जाती है?
मकर संक्रांति (14 January) वह दिन है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है और उत्तरायण की शुरुआत होती है।
इस दिन से सूर्य की गति दक्षिण से उत्तर की ओर हो जाती है और दिन धीरे‑धीरे बड़े होने लगते हैं।
भारतीय परंपरा में सूर्य को केवल ग्रह नहीं, बल्कि ऊर्जा, जीवन और चेतना का स्रोत माना गया है। उत्तरायण को:
- शुभ समय की शुरुआत
- स्वास्थ्य और ऊर्जा का काल
- आत्मिक उन्नति का अवसर
माना जाता है। इसी कारण मकर संक्रांति को नई शुरुआत और सकारात्मक संकल्पों का पर्व कहा गया है।
Makar Sankranti: उत्तरायण का वैज्ञानिक महत्व
आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार करता है कि उत्तरायण के बाद:
- सूर्य की किरणें अधिक लाभकारी होती हैं
- शरीर की रोग‑प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होने लगती है
- सर्दियों की चरम ठंड धीरे‑धीरे कम होती है
यही कारण है कि इस समय ऊष्मा देने वाले, पौष्टिक और प्राकृतिक खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की परंपरा बनी।
त्योहार और विज्ञान यहाँ अलग‑अलग नहीं, बल्कि एक‑दूसरे के पूरक हैं।
Makar Sankranti: पर तिल–गुड़ क्यों खाया जाता है?
तिल और गुड़ मकर संक्रांति की पहचान हैं — और इसके पीछे मजबूत वैज्ञानिक कारण हैं।
तिल (Sesame):
- शरीर को अंदर से गर्म रखता है
- कैल्शियम, आयरन और हेल्दी फैट्स से भरपूर
- सर्दियों में जोड़ों और त्वचा के लिए लाभकारी
गुड़ (Jaggery):
- प्राकृतिक मिठास का स्रोत
- पाचन को बेहतर बनाता है
- शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है
तिल–गुड़ का संयोजन सर्दियों में शरीर को संतुलित रखने का एक पारंपरिक विज्ञान है।
इसीलिए कहा जाता है: “तिल–गुड़ खाओ, मीठा बोलो ” — यानी शरीर के साथ‑साथ रिश्तों में भी मिठास बनाए रखो।
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Makar Sankranti: की सात्विक और मौसमी रेसिपीज़
मकर संक्रांति पर बनने वाली मिठाइयाँ दिखने में भले साधारण हों, लेकिन पोषण और परंपरा से भरपूर होती हैं। नीचे दी गई सभी रेसिपीज़:
- पूरी तरह सात्विक हैं
- सिर्फ तिल और गुड़ से बनी हैं
- मौसमी और जैन जीवनशैली के अनुरूप हैं
1. तिल–गुड़ के लड्डू
सबसे लोकप्रिय संक्रांति मिठाई, जो हर घर में बनाई जाती है।
क्यों खास?
ये लड्डू सर्दियों में शरीर को ऊष्मा देते हैं और लंबे समय तक ऊर्जा बनाए रखते हैं।
RECIPE:
2. तिल की पापड़ी (तिल–गुड़ पापड़ी)
पतली, कुरकुरी और लंबे समय तक चलने वाली पारंपरिक मिठाई।
फायदा:
कम मात्रा में भी पेट को संतुष्ट करती है और अधिक मीठी नहीं लगती।
RECIPE:
3. तिल–गुड़ चिक्की
भुने तिल और गुड़ से बनी हार्ड लेकिन हेल्दी मिठाई।
संक्रांति पर क्यों?
यह शरीर को तुरंत ऊर्जा देती है और ठंड से बचाव करती है।
RECIPE:
4. तिल–गुड़ की गजक
उत्तर भारत की प्रसिद्ध संक्रांति मिठाई, जो कुरकुरी और स्वादिष्ट होती है।
विशेषता:
यह लंबे समय तक खराब नहीं होती और यात्रा में भी आसानी से रखी जा सकती है।
RECIPE:
5. तिल–गुड़ बॉल्स (Soft Laddu Style)
नरम बनावट वाली मिठाई, जो बच्चों और बुज़ुर्गों के लिए आसान होती है।
क्यों बेहतर?
कम चबाने में आसानी और समान पोषण।
RECIPE:
6. तिल की बर्फी (गुड़ से बनी)
सफेद चीनी के बिना बनी, प्राकृतिक मिठास वाली बर्फी।
फायदा:
यह शरीर को अचानक शुगर स्पाइक दिए बिना मीठा स्वाद देती है।
RECIPE:
7. तिल–गुड़ की रेवड़ी
छोटे आकार में ज्यादा स्वाद और ऊष्मा देने वाली मिठाई।
संक्रांति पर क्यों?
थोड़ी‑सी मात्रा में भी ऊर्जा प्रदान करती है।
RECIPE:
8. तिल–गुड़ रोल / तिल पट्टी
महाराष्ट्र और गुजरात में प्रचलित पारंपरिक स्वरूप।
खास बात:
यह दिखने में साधारण लेकिन पोषण में भरपूर होती है।
RECIPE:
Makar Sankranti: का प्रेरणादायक संदेश
मकर संक्रांति हमें सिखाती है कि:
- जीवन में दिशा बदलना जरूरी है
- भोजन केवल स्वाद नहीं, बल्कि ऊर्जा है
- परंपराएँ बोझ नहीं, बल्कि अनुभव से निकला ज्ञान हैं
जैसे सूर्य अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ता है, वैसे ही हमें भी नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर बढ़ना चाहिए।
निष्कर्ष: स्वाद, स्वास्थ्य और संतुलन का पर्व
मकर संक्रांति सिर्फ एक दिन का त्योहार नहीं, बल्कि पूरे मौसम की जीवनशैली है। तिल–गुड़ से बनी सात्विक मिठाइयाँ हमें याद दिलाती हैं कि:
- कम सामग्री में भी पूर्ण पोषण संभव है
- प्राकृतिक भोजन ही सबसे श्रेष्ठ है
- सादगी में ही असली समृद्धि है
इस मकर संक्रांति, तिल–गुड़ के साथ मीठी सोच, सात्विक भोजन और संतुलित जीवन अपनाएँ — यही इस पर्व का सच्चा अर्थ है।
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“मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ!” 🌞