दश लक्षण पर्व: घर पर रहने वालों के लिए नियम- मुनिश्री सुधासागर जी महाराज 

दश लक्षण पर्व: घर पर रहने वालों के लिए खास नियम

दश लक्षण पर्व जैन धर्म का प्रमुख आत्मचिंतन और आत्मशुद्धि का पर्व है। इन दिनों व्यक्ति अपने जीवन, विचार और व्यवहार को करीब से देखने का प्रयास करता है। पर्युषण केवल पूजा-पाठ या धार्मिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संयम, तप, स्वाध्याय, प्रार्थना, प्रतिक्रमण और आत्मसुधार का अवसर भी है।

इन दिनों कई लोग शिविरों में जाकर धार्मिक साधना करते हैं, लेकिन हर व्यक्ति के लिए शिविर में शामिल होना संभव नहीं होता। इसी भावना को ध्यान में रखते हुए मुनि श्री सुधासागर जी ने उन लोगों के लिए भी 10 दिनों के विशेष नियम बताए हैं, जो शिविर में शामिल नहीं हो सकते और घर पर रहकर पर्युषण पर्व मनाएंगे।

इन नियमों में केवल धार्मिक क्रियाएं ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कई आदतों में संयम रखने की बात कही गई है।

10 दिनों में विशेष रूप से ध्यान दिया गया है:

  • सुबह जल्दी उठकर धार्मिक दिनचर्या शुरू करने पर।
  • भोजन और रोजमर्रा की आदतों में संयम रखने पर।
  • क्रोध, निंदा और झगड़े से दूर रहने पर।
  • मंदिर, पूजन, जाप और प्रतिक्रमण को दिनचर्या में शामिल करने पर।
  • मनोरंजन और अनावश्यक सांसारिक गतिविधियों को सीमित करने पर।
  • दान, ब्रह्मचर्य और आत्मचिंतन जैसे संकल्प लेने पर।

आइए जानते हैं, मुनि श्री सुधासागर जी द्वारा बताए गए इन 10 दिनों के विशेष नियमों में क्या-क्या शामिल है।

1. पर्युषण पर्व: सूर्योदय से पहले उठकर णमोकार मंत्र का जाप

पर्युषण के इन 10 दिनों में दिन की शुरुआत से ही संयम रखने पर जोर दिया गया है। मुनि श्री सुधासागर जी ने सूर्योदय से पहले उठने और दिन की शुरुआत णमोकार मंत्र के जाप से करने की बात कही। सुबह का समय आत्मचिंतन और धार्मिक साधना के लिए महत्वपूर्ण माना गया है।

इन 10 दिनों में:

  • सूर्योदय से पहले उठें।
  • उठने के बाद 9 बार णमोकार मंत्र पढ़ें।
  • सुबह का समय मोबाइल और अनावश्यक गतिविधियों के बजाय धार्मिक कार्यों में लगाने का प्रयास करें।
2. बाजार के पेस्ट की जगह घर का या आयुर्वेदिक मंजन

पर्युषण में रोजमर्रा की आदतों में भी संयम लाने की बात कही गई है। इसी क्रम में 10 दिनों तक बाजार के सामान्य मंजन के बजाय घर का बना या आयुर्वेदिक मंजन इस्तेमाल करने का नियम बताया गया।

इस दौरान:

  • घर का बना मंजन इस्तेमाल करें।
  • आयुर्वेदिक सूखा मंजन इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • 10 दिनों तक बाजार के सामान्य पेस्ट से बचने का प्रयास करें।
3. चाय-कॉफी और नशे से पूरी दूरी

पर्युषण में इंद्रियों और आदतों पर नियंत्रण को विशेष महत्व दिया गया है। इसलिए चाय और कॉफी जैसी रोजमर्रा की आदतों को भी कुछ समय के लिए छोड़ने की बात कही गई है। साथ ही किसी भी तरह के नशे से पूरी तरह दूर रहने का संदेश दिया गया।

10 दिनों तक इन चीजों का त्याग करें:

  • चाय और कॉफी।
  • गुटखा और तंबाकू।
  • सिगरेट और बीड़ी।
  • गांजा और अन्य नशीले पदार्थ।

दूध आदि लेने की बात कही गई है।

4. होटल का भोजन नहीं, घर का भोजन करें

इन 10 दिनों में भोजन को भी धर्म और संयम से जोड़ने पर जोर दिया गया है। मुनि श्री ने बाजार और होटल में भोजन करने के बजाय घर में बना भोजन करने की बात कही। साथ ही पानी भी घर से लेकर चलने का संदेश दिया गया।

इस दौरान ध्यान रखें:

  • होटल और बाजार का भोजन न करें।
  • भोजन घर पर ही बनाएं और खाएं।
  • पानी भी घर से लेकर चलें।
  • भोजन को सादा और संयमित रखने का प्रयास करें।
5. भोजन की संख्या और मात्रा पर रखें नियंत्रण

पर्युषण में भोजन केवल स्वाद के लिए नहीं, बल्कि आवश्यकता के अनुसार करने की भावना है। इसलिए इन 10 दिनों में भोजन की संख्या सीमित रखने की बात कही गई। जो लोग अधिक तप और संयम कर सकते हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार उपवास या एकासन भी कर सकते हैं।

भोजन को लेकर मुख्य नियम:

  • अधिकतम दो बार भोजन करें।
  • सामर्थ्य हो तो उपवास या एकासन करें।
  • बार-बार कुछ खाने की आदत से बचें।
  • कम से कम एक बार मौनपूर्वक भोजन करें।
6. हेयरकट, शेविंग और ब्यूटी पार्लर से दूरी

इन दिनों बाहरी सजावट से ज्यादा आत्मचिंतन पर ध्यान देने की बात कही गई है। इसलिए पुरुषों को हेयरकट और शेविंग से बचने के लिए कहा गया है। महिलाओं को भी ब्यूटी पार्लर और प्रसाधनों से दूरी रखने का नियम बताया गया।

इन 10 दिनों में:

  • हेयरकट न करवाएं।
  • शेविंग या दाढ़ी बनाने से बचें।
  • ब्यूटी पार्लर न जाएं।
  • पर्व के विशेष दिनों में भी इस नियम का पालन करें।
7. पुरुष प्रतिदिन करें अभिषेक और पूजन

पर्युषण की धार्मिक दिनचर्या में अभिषेक और पूजन को विशेष स्थान दिया गया है। मुनि श्री सुधासागर जी ने पुरुषों के लिए प्रतिदिन धोती-दुपट्टा पहनकर अभिषेक और कम से कम एक पूजन करने की बात कही।

इस नियम में:

  • 8 वर्ष से 80 वर्ष तक के पुरुषों का उल्लेख किया गया है।
  • प्रतिदिन अभिषेक करने पर जोर दिया गया है।
  • अभिषेक के साथ कम से कम एक पूजन करने की बात कही गई है।
  • संभव हो तो धार्मिक कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल हों।
8. दश लक्षण पर्व: महिलाएं करें पूजन और अभिषेक से जुड़ें

महिलाओं को भी इन 10 दिनों में नियमित धार्मिक गतिविधियों से जुड़े रहने के लिए कहा गया है। वे प्रतिदिन पूजन करें और यदि संभव हो तो अभिषेक भी देखें। मंदिर जाना संभव न हो तो घर पर भी धार्मिक दिनचर्या बनाए रखने का प्रयास किया जा सकता है।

महिलाओं के लिए बताए गए नियम:

  • प्रतिदिन पूजन करें।
  • संभव हो तो अभिषेक देखें।
  • पुरुष सदस्य द्वारा अभिषेक से लाए गए गंधोदक को ग्रहण करने के बाद भोजन करने की बात कही गई है।
9. दश लक्षण पर्व: साबुन, सर्फ और वॉशिंग मशीन का त्याग

पर्युषण के दौरान संयम और जीवदया की भावना को ध्यान में रखते हुए साबुन और कपड़े धोने से जुड़े कई नियम बताए गए हैं। 10 दिनों तक कपड़े न धोने और वॉशिंग मशीन का प्रयोग न करने की बात कही गई। इसलिए पहले से कपड़ों की व्यवस्था करने का सुझाव दिया गया।

इन दिनों:

  • साबुन का प्रयोग न करें।
  • सर्फ और सोडा का प्रयोग न करें।
  • कपड़े न धोएं।
  • वॉशिंग मशीन का इस्तेमाल न करें।
  • 10 दिनों के लिए पहले से कपड़े अलग रख लें।
  • स्नान के लिए खड़िया मिट्टी, बेसन और चंदन जैसे विकल्पों का उल्लेख किया गया है।
10. पानी के इस्तेमाल में भी रखें संयम

इन नियमों में पानी को लेकर भी विशेष बात कही गई है। जहां संभव हो, कुएं या हैंडपंप के पानी का इस्तेमाल करने की बात कही गई। साथ ही बोतलबंद पानी से बचने का नियम बताया गया।

इसलिए:

  • संभव हो तो कुएं या हैंडपंप का पानी लें।
  • बोतलबंद पानी से बचें।
  • पानी का अनावश्यक इस्तेमाल न करें।
11. पर्युषण पर्व: खान-पान में विशेष संयम रखें

पर्युषण के इन दिनों में भोजन को लेकर कुछ विशेष संयम भी बताए गए हैं। प्रवचन में दही और छाछ के साथ दाल आदि के सेवन से बचने की बात कही गई है। इसे इन 10 दिनों के विशेष आहार-संयम के रूप में बताया गया।

इन दिनों:

  • दही और छाछ के साथ दाल आदि के सेवन से बचें।
  • भोजन को सादा और संयमित रखें।
  • स्वाद से ज्यादा संयम को प्राथमिकता दें।
12. क्रोध, झगड़े और बैरभाव से बचें

पर्युषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा केवल भोजन का संयम नहीं, बल्कि मन और व्यवहार का संयम भी है। इसलिए मुनि श्री ने 10 दिनों तक लड़ाई-झगड़े और क्रोध से दूर रहने पर विशेष जोर दिया। खासकर मंदिर और धार्मिक स्थलों पर किसी बात को लेकर विवाद न करने की प्रेरणा दी गई।

इस दौरान संकल्प लें:

  • किसी से झगड़ा न करें।
  • किसी पर क्रोध न करें।
  • मारपीट से पूरी तरह दूर रहें।
  • किसी के प्रति बैरभाव न रखें।
  • मंदिर में छोटी बात को विवाद का कारण न बनाएं।
  • धार्मिक आयोजनों में शांतिपूर्ण व्यवहार रखें। https://jinspirex.com/ganesh-chaturthi-shri-ganesh-ko-lekar-muni-praman-sagar-ji-ki-khas-baat/
13. पर्युषण पर्व: अनावश्यक यात्रा से बचें

इन 10 दिनों में अपना अधिक से अधिक समय धर्म और आत्मचिंतन में लगाने की बात कही गई है। इसलिए गैर-जरूरी यात्रा और बाहर जाने से बचने का नियम बताया गया। धार्मिक कार्यों या अत्यावश्यक परिस्थितियों को अलग रखा गया है।

इसलिए:

  • अनावश्यक यात्रा न करें।
  • गैर-जरूरी कामों के लिए शहर से बाहर न जाएं।
  • धार्मिक कार्यों के लिए जाना संभव है।
  • मृत्यु जैसी अत्यावश्यक परिस्थिति को अपवाद माना गया है।
14. दश लक्षण पर्व: ताश, जुआ और सट्टे से रहें दूर

पर्युषण में समय और धन दोनों का संयम जरूरी है। इसलिए ताश, जुआ और शर्त जैसे मनोरंजन से बचने की बात कही गई। साथ ही सट्टा और डब्बा जैसे सौदों तथा अनावश्यक खरीद-बिक्री से भी दूरी रखने का संदेश दिया गया।

10 दिनों तक:

  • ताश और जुआ न खेलें।
  • किसी तरह की शर्त न लगाएं।
  • सट्टा और डब्बा जैसे सौदों से बचें।
  • अनावश्यक खरीद-बिक्री और लेन-देन से दूरी रखें।
15. रेशम, सिल्क और चमड़े का त्याग

जीवदया की भावना को ध्यान में रखते हुए रेशम और चमड़े से बनी वस्तुओं के उपयोग से बचने की बात कही गई। इन 10 दिनों में ऐसे सामानों का इस्तेमाल न करने का विशेष नियम बताया गया।

इसमें शामिल हैं:

  • रेशम और सिल्क की वस्तुएं।
  • चमड़े से बनी वस्तुएं।
  • चमड़े के जूते या अन्य सामान।
16. कॉस्मेटिक्स और प्रसाधनों से 10 दिन की दूरी

पर्युषण में बाहरी सुंदरता के बजाय भीतर के गुणों पर ध्यान देने की प्रेरणा दी गई है। इसी भावना से 10 दिनों तक लिपस्टिक, नेल पॉलिश और अन्य प्रसाधनों का प्रयोग न करने की बात कही गई।

इन दिनों त्याग करें:

  • लिपस्टिक।
  • नेल पॉलिश।
  • पाउडर और अन्य मेकअप।
  • शैंपू।
  • अन्य सौंदर्य प्रसाधन।
17. प्रतिदिन जाप और स्तोत्र पाठ करें

पर्युषण में स्वाध्याय और धार्मिक पाठ का विशेष महत्व है। इसलिए रोज किसी जाप या स्तोत्र को अपनी दिनचर्या में शामिल करने की बात कही गई है। इससे मन को धार्मिक गतिविधियों में लगाए रखने का प्रयास किया जा सकता है।

आप इन दिनों:

  • प्रतिदिन जाप करें।
  • भक्तामर स्तोत्र का पाठ करें।
  • अथवा जो स्तोत्र आपको आता हो, उसका नियमित पाठ करें।
18. सुबह और शाम मंदिर जाएं

यदि स्वास्थ्य और परिस्थितियां अनुमति दें, तो इन 10 दिनों में सुबह और शाम मंदिर जाने का नियम बताया गया है। साथ ही पर्व के दौरान होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में उपस्थित रहने की बात कही गई।

ध्यान रखें:

  • सुबह मंदिर जाएं।
  • शाम को भी मंदिर जाने का प्रयास करें।
  • धार्मिक आयोजनों में उपस्थित रहें।
  • अपनी क्षमता के अनुसार धार्मिक गतिविधियों में सहभागिता करें।
19. कपड़ों की संख्या सीमित करें

पर्युषण सादगी का भी संदेश देता है। इसलिए इन दिनों जरूरत से ज्यादा कपड़े इस्तेमाल न करने और अपनी कपड़ों की सीमा तय करने की बात कही गई है।

इसके लिए:

  • कपड़ों की संख्या सीमित रखें।
  • 2–4 जोड़ी कपड़ों तक सीमित रहने का उदाहरण दिया गया है।
  • पुरुष संभव हो तो धोती-दुपट्टा पहनकर धार्मिक गतिविधियों में शामिल हों।
20. दश लक्षण पर्व: प्रतिदिन कुछ न कुछ दान करें

पर्युषण में आत्मशुद्धि के साथ दूसरों के प्रति करुणा और सेवा की भावना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए प्रतिदिन अपनी क्षमता के अनुसार कुछ न कुछ दान करने की प्रेरणा दी गई है।

आप कर सकते हैं:

  • धार्मिक कार्य में दान।
  • जरूरतमंद की सहायता।
  • अपनी क्षमता के अनुसार नियमित सहयोग।
  • दान को भावना और सेवा से जोड़ें।
21. निंदा और आलोचना छोड़ें

किसी व्यक्ति की निंदा करना या उसकी कमियां निकालना मन में नकारात्मकता बढ़ा सकता है। इसलिए 10 दिनों तक किसी की निंदा और आलोचना न करने का नियम बताया गया है।

इन दिनों संकल्प लें:

  • किसी की निंदा नहीं करेंगे।
  • अनावश्यक आलोचना नहीं करेंगे।
  • किसी से बैरभाव नहीं रखेंगे।
  • विवाद बढ़ाने के बजाय बात को शांत करने का प्रयास करेंगे।
22. प्रतिदिन करें प्रतिक्रमण

दिनभर में हुई गलतियों पर विचार करना पर्युषण की साधना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए हर शाम प्रतिक्रमण करने की बात कही गई है। यदि किसी कारण से प्रतिक्रमण संभव न हो तो आलोचना पाठ करने का सुझाव दिया गया।

इसलिए:

  • शाम को प्रतिदिन प्रतिक्रमण करें।
  • अपनी गलतियों पर विचार करें।
  • प्रतिक्रमण संभव न हो तो आलोचना पाठ करें।
  • दिनभर के व्यवहार को सुधारने का प्रयास करें।
23. रात में अन्न और जल का त्याग

इन नियमों में रात के समय भोजन और पानी के त्याग का भी उल्लेख किया गया है। 8 से 80 वर्ष तक के लोगों के लिए रात में अन्न और जल दोनों का त्याग करने की बात कही गई। गंभीर बीमारी या आवश्यक औषधि जैसी परिस्थितियों को अलग रखा गया है।

ध्यान देने योग्य बात:

  • रात में अन्न और जल का त्याग करने का नियम बताया गया है।
  • 8 से 80 वर्ष तक के लोगों के लिए इसका उल्लेख है।
  • गंभीर बीमारी या आवश्यक चिकित्सा परिस्थिति में अपवाद रखा गया है।
24. दवाइयों को लेकर भी संयम

प्रवचन में सामान्य परिस्थितियों में 10 दिनों के दौरान अंग्रेजी दवाइयों से बचने की बात कही गई है। हालांकि गंभीर या आवश्यक चिकित्सा परिस्थितियों को अलग रखा गया है। स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक दवाइयां डॉक्टर की सलाह के बिना बंद नहीं करनी चाहिए।

इसलिए:

  • यह नियम प्रवचन में बताए गए संयम के संदर्भ में है।
  • गंभीर या आवश्यक चिकित्सा परिस्थिति में उपचार को प्राथमिकता दें।
  • नियमित या जरूरी दवा डॉक्टर की सलाह के बिना बंद न करें।
25. सुबह परिवार में कहें—जय जिनेंद्र

पर्युषण का वातावरण केवल व्यक्ति तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इसकी शुरुआत परिवार से भी हो सकती है। इसलिए सुबह उठकर परिवार के सदस्यों को एक-दूसरे से “जय जिनेंद्र” कहने का नियम बताया गया है।

यह छोटी-सी आदत घर के वातावरण को धार्मिक और सकारात्मक बनाने का माध्यम बन सकती है।

26. दश लक्षण पर्व: व्यापार का समय भी करें सीमित

पर्युषण में व्यापार और सांसारिक गतिविधियों से कुछ समय निकालकर धर्म को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। व्यापार पूरी तरह बंद करना संभव हो तो अच्छा है। यदि ऐसा संभव न हो, तो व्यापार के लिए निश्चित समय निर्धारित करने को कहा गया है।

इस दौरान:

  • संभव हो तो व्यापार बंद रखें।
  • अन्यथा व्यापार का समय निश्चित करें।
  • सुबह का समय धार्मिक कार्यों के लिए रखें।
  • दोपहर 12 बजे से पहले दुकान न खोलने का नियम बताया गया है।
27. 10 दिनों के लिए ब्रह्मचर्य व्रत

पर्युषण आत्मसंयम का पर्व है। इसलिए इन 10 दिनों में सभी लोगों को ब्रह्मचर्य व्रत रखने की बात कही गई है। यह नियम इच्छाओं और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने की भावना से जुड़ा है।

इस दौरान व्यक्ति अपना ध्यान धार्मिक गतिविधियों, स्वाध्याय और आत्मचिंतन की ओर लगाने का प्रयास कर सकता है।

28. टीवी, क्रिकेट और फिल्मों से दूरी

इन 10 दिनों में मनोरंजन की गतिविधियों को सीमित रखने का स्पष्ट संदेश दिया गया है। टीवी, क्रिकेट मैच, फिल्म और अन्य मनोरंजन से दूरी रखने को कहा गया है। धार्मिक प्रवचन और धार्मिक सामग्री को इससे अलग रखा गया है।

इसलिए:

  • टीवी न देखें।
  • क्रिकेट मैच से दूरी रखें।
  • फिल्में न देखें।
  • अनावश्यक मनोरंजन से बचें।
  • धार्मिक प्रवचन और धार्मिक कार्यक्रम देख-सुन सकते हैं।
29. मोबाइल पर भी रखें संयम

आज मोबाइल मनोरंजन का एक बड़ा माध्यम बन गया है। इसलिए पर्युषण में केवल टीवी और फिल्मों से दूरी बनाना ही पर्याप्त नहीं माना गया, बल्कि मोबाइल के इस्तेमाल में भी संयम रखने की बात कही गई है।

इन 10 दिनों में:

  • मोबाइल पर गेम न खेलें।
  • फिल्में न देखें।
  • ऐसी सामग्री से बचें जो राग-द्वेष बढ़ाए।
  • मोबाइल का उपयोग समाचार और धार्मिक सामग्री जैसी उपयोगी चीजों के लिए करें।

दश लक्षण पर्व: पर्युषण के इन 10 दिनों का असली उद्देश्य क्या है?

इन सभी नियमों को देखें तो एक बात स्पष्ट होती है—पर्युषण केवल कुछ चीजें छोड़ने का पर्व नहीं, बल्कि खुद को बदलने का अवसर है।

भोजन में संयम रखना जरूरी है, लेकिन साथ ही वाणी में संयम भी जरूरी है। मंदिर जाना महत्वपूर्ण है, लेकिन मंदिर में जाकर किसी से विवाद करना उस भावना के विपरीत हो सकता है। उपवास करना साधना है, लेकिन किसी की निंदा छोड़ना भी आत्मसंयम का ही एक रूप है।

इन 10 दिनों में व्यक्ति अपने समय, भोजन, व्यवहार, इच्छाओं, मनोरंजन और सांसारिक गतिविधियों पर नियंत्रण रखने का प्रयास करता है। यही छोटे-छोटे संकल्प आगे चलकर जीवन में बड़े बदलाव ला सकते हैं।

इस पर्युषण खुद से कुछ सवाल जरूर पूछें—

  • क्या मैं अपना क्रोध कम कर सकता हूं?
  • क्या मैं किसी पुराने बैर को खत्म कर सकता हूं?
  • क्या मैं निंदा और आलोचना छोड़ सकता हूं?
  • क्या मैं अपने भोजन और समय में संयम ला सकता हूं?
  • क्या मैं रोज कुछ समय जाप, स्वाध्याय और आत्मचिंतन को दे सकता हूं?

दश लक्षण पर्व: इस पर्युषण सिर्फ नियम न लें, एक बदलाव लेकर उठें

पर्युषण के ये 10 दिन कैलेंडर पर आने और चले जाने वाले सामान्य दिन नहीं हैं। यह अपने भीतर देखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर हैं। इसलिए कोशिश करें कि इन दिनों अपनाया गया कम से कम एक अच्छा नियम पर्व के बाद भी आपकी जिंदगी का हिस्सा बना रहे।

क्योंकि सच्चा पर्व वही है, जिसके खत्म होने के बाद हमारे विचार थोड़े शांत, व्यवहार थोड़ा बेहतर और जीवन थोड़ा अधिक संयमित हो जाए।

https://www.munipramansagar.net/how-to-get-rid-of-anger/

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