Bharuch Juma Masjid: 700 साल पुराने तहखाने से मिलीं जैन मूर्तियां
Bharuch Juma Masjid: गुजरात के भरूच में स्थित ऐतिहासिक जामा मस्जिद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार वजह कोई सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक ऐसी खोज है जिसने इतिहासकारों, धार्मिक संगठनों और स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
करीब 700 वर्षों से बंद बताए जा रहे तहखाने को जब निरीक्षण के लिए खोला गया, तो वहां से कथित रूप से जैन तीर्थंकर भगवान मल्लिनाथ और अन्य जैन देवताओं की प्रतिमाएं मिलीं।
इस खोज के बाद वर्षों से चल रहा विवाद अचानक और गहरा हो गया है।
Bharuch Juma Masjid: आखिर क्या मिला तहखाने में?
मिली जानकारी के अनुसार तहखाने से कई जैन प्रतिमाएं बरामद हुई हैं।
इनमें शामिल हैं:
- भगवान मल्लिनाथ की प्रतिमा
- अन्य जैन देवी-देवताओं की मूर्तियां
- प्राचीन शिलालेख
- विक्रम संवत 1213 अंकित होने का दावा
यदि इन शिलालेखों की पुष्टि होती है, तो यह खोज ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा सकती है।
Bharuch Juma Masjid: क्यों चर्चा में आया यह मामला?
पिछले छह महीनों से इस स्थल को लेकर आंदोलन चल रहा था।
जैन संतों, साधुओं और कई संगठनों ने दावा किया कि वर्तमान जामा मस्जिद का परिसर मूल रूप से “जैन समरी विहार” था।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें थीं:
- पूरे परिसर का सर्वे कराया जाए
- बंद तहखाने की जांच हो
- पुरातात्विक साक्ष्यों को सार्वजनिक किया जाए
- ऐतिहासिक दस्तावेजों की समीक्षा हो
इन्हीं मांगों के बाद जांच प्रक्रिया आगे बढ़ी।
Jain Idols: पुरातत्व विभाग ने क्या किया?
विवाद बढ़ने के बाद पुरातत्व विभाग ने स्थल का निरीक्षण शुरू किया।
जांच के दौरान:
- बंद तहखाने को खोला गया
- वीडियो रिकॉर्डिंग की गई
- फोटोग्राफिक दस्तावेज तैयार किए गए
- प्रारंभिक रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को भेजी गई
सूत्रों के अनुसार पूरी प्रक्रिया को आधिकारिक रिकॉर्ड में दर्ज किया गया है।
Jainism: जैन संगठनों का दावा क्या है?
जैन और हिंदू संगठनों का कहना है कि यह खोज उनके लंबे समय से किए जा रहे दावों को मजबूत करती है।
उनका कहना है कि:
- संरचना के कई स्तंभों पर जैन शैली की नक्काशी दिखाई देती है
- परिसर में प्राचीन जैन वास्तुकला के संकेत मौजूद हैं
- तहखाने से मिली प्रतिमाएं स्थल के मूल स्वरूप की ओर इशारा करती हैं
कुछ संगठनों का मानना है कि यह स्थान कभी जैन उपासना का प्रमुख केंद्र रहा होगा।
Bharuch Juma Masjid: महंत मुक्तानंद स्वामी ने क्या कहा?
भरूच स्थित शंकराचार्य मठ के महंत मुक्तानंद स्वामी ने दावा किया है कि यह स्थल जैन समरी विहार रहा है।
उनके अनुसार:
- मिली प्रतिमाएं महत्वपूर्ण साक्ष्य हैं
- विक्रम संवत 1213 का उल्लेख विशेष महत्व रखता है
- पूरे परिसर की गहन जांच होनी चाहिए
- ऐतिहासिक तथ्यों को सामने लाया जाना चाहिए
उन्होंने मामले में विस्तृत पुरातात्विक अध्ययन की मांग की है।
Bharuch Juma Masjid: मस्जिद ट्रस्ट का पक्ष
दूसरी तरफ जामा मस्जिद ट्रस्ट इन दावों से सहमत नहीं है।https://jinspirex.com/white-line-dispute-dharm-aur-vigyan-se-samajhiye-safed-rekha-ka-mahatva/
ट्रस्ट का कहना है कि:
- यह सदियों पुरानी मस्जिद है
- यहां लंबे समय से नमाज अदा होती रही है
- मस्जिद का रिकॉर्ड सरकारी दस्तावेजों में मौजूद है
- वक्फ बोर्ड से पंजीकृत ट्रस्ट इसका प्रबंधन करता है
ट्रस्ट का आरोप है कि कुछ समूह अनावश्यक विवाद खड़ा कर रहे हैं।
Gujrat: 1907 के रिकॉर्ड का भी जिक्र
मस्जिद प्रबंधन का कहना है कि यह स्थल 1907 से भारत सरकार के राजपत्र में दर्ज है।
ट्रस्ट के अनुसार:
- सरकारी रिकॉर्ड उनके पक्ष का समर्थन करते हैं
- कानूनी सलाह ली जा चुकी है
- आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जाएगा
यही कारण है कि अब यह विवाद केवल धार्मिक नहीं बल्कि कानूनी रूप भी ले सकता है।
Bharuch Juma Masjid: प्रशासन ने क्या कदम उठाए?
स्थिति को देखते हुए प्रशासन सतर्क हो गया है।
फिलहाल:
- तहखाने के एक प्रवेश द्वार को सील किया गया है
- सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है
- कानून व्यवस्था पर निगरानी रखी जा रही है
- अतिरिक्त जांच जारी है
अधिकारियों का उद्देश्य किसी भी तरह के तनाव को रोकना है।
कुछ और चीजें भी जांच के दायरे में
रिपोर्टों के अनुसार पुरातत्व विभाग कुछ अन्य व्यवस्थाओं की भी जांच कर रहा है।
इनमें शामिल हैं:
- वजू की व्यवस्था
- बिजली फिटिंग
- पंखे
- प्रकाश व्यवस्था
- अन्य संरचनात्मक बदलाव
यह देखा जा रहा है कि कहीं संरक्षित स्मारक के भीतर कोई परिवर्तन बिना अनुमति तो नहीं किया गया।
Bharuch Juma Masjid: भरूच का ऐतिहासिक महत्व
भरूच भारत के सबसे प्राचीन नगरों में गिना जाता है।
यह शहर:
- प्राचीन व्यापारिक मार्गों का हिस्सा रहा
- कई संस्कृतियों का केंद्र रहा
- जैन, हिंदू और इस्लामी विरासत को समेटे हुए है
- ऐतिहासिक स्मारकों के लिए जाना जाता है
इसी वजह से यहां मिलने वाला हर पुरातात्विक साक्ष्य विशेष महत्व रखता है।
Bharuch Juma Masjid: आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल सभी की नजर पुरातत्व विभाग की अंतिम रिपोर्ट पर है।
आने वाले समय में:
- प्रतिमाओं की वैज्ञानिक जांच हो सकती है
- शिलालेखों का अध्ययन होगा
- विशेषज्ञ राय ली जाएगी
- प्रशासनिक निर्णय लिए जाएंगे
- कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ सकती है
इन सभी पहलुओं पर आगे की दिशा निर्भर करेगी।
Bharuch Juma Masjid: निष्कर्ष
भरूच जामा मस्जिद के 700 साल पुराने बताए जा रहे तहखाने से मिली जैन प्रतिमाओं ने एक पुराने विवाद को नई ऊर्जा दे दी है।
एक पक्ष इसे ऐतिहासिक साक्ष्य बता रहा है। दूसरा पक्ष इन दावों को खारिज कर रहा है।
सच्चाई क्या है, इसका अंतिम उत्तर पुरातात्विक जांच, दस्तावेजी प्रमाण और कानूनी प्रक्रिया से ही सामने आएगा।
फिलहाल इतना तय है कि भरूच का यह विवाद आने वाले दिनों में देशभर में चर्चा का विषय बना रह सकता है।
https://english.gujaratsamachar.com/news/gujarat/bharuch-juma-mosque-row-deepens-after-jain-idols-found-in-basement-sealed-for-700-years-26116077473.html