मकर संक्रांति क्या है — और क्यों मनाते हैं?
मकर संक्रांति वह समय है जब सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है।
भारत में इसे—
- नए मौसम की शुरुआत,
- फसल का उत्सव,
- नई उम्मीदों का प्रतीक
माना जाता है।
छतों पर हंसी, तिल-गुड़ के लड्डू, आकाश में रंगीन पतंगें — सब बहुत खूबसूरत लगता है।
लेकिन इस खूबसूरती के पीछे एक कटु सच्चाई भी है —
जिसे हम अक्सर अनदेखा कर देते हैं।
पतंग — और खासकर मांझा — जानलेवा कैसे बन जाता है?
हम सोचते हैं:
“बस धागा ही तो है!”
लेकिन यही धागा जब कांच/नायलॉन/मेटल से लैपित होता है, तो यह:
- पक्षियों के पंख काट देता है,
- बाइक चलाते समय गले में फँस जाता है,
- बिजली की तारों में उलझकर बड़े हादसे करा देता है,
- सड़कों पर भागते बच्चों को गिरा देता है।
कई बार यह मज़े का खेल
जिंदगी भर का दर्द बन जाता है।
वास्तविक घटनाएँ — जो आँखें खोल देती हैं
1. मुंबई: 700+ पक्षी घायल
मकर संक्रांति के दौरान मुंबई में 700 से ज़्यादा पक्षी मांझे में फँसकर घायल पाए गए — जिनमें कबूतर, उल्लू और बाज़ शामिल थे। कई इंसान भी कटने-छिलने से घायल हुए। Read Full News
2. गुजरात: गले कटने से मौतें
Uttarayan के दौरान गुजरात में पतंग-डोर से जुड़े हादसों में
- बच्चों सहित कई लोगों की मौत हुई
- दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।
एक रिपोर्ट के अनुसार कुछ वर्षों में त्योहार के दिनों में एक ही राज्य में कई मौतों के मामले सामने आए। Read Full News
3. रेलवे की सख्त चेतावनी
Railway विभाग ने लोगों से कहा है —
ट्रैक और बिजली लाइनों के पास पतंग न उड़ाएँ —
क्योंकि नायलॉन/चीनी मांझा बिजली से संपर्क में आकर घातक हादसे करा सकता है। Read Full News
4. Awareness Run — खतरा स्वीकार किया गया
Hyderabad में मांझे के नुकसान पर एक awareness run आयोजित हुई — जहाँ साफ कहा गया कि हर साल हज़ारों पक्षी और कई इंसान इससे घायल होते हैं। Read Full News
5. कई शहरों में प्रतिबंध
नुकसान बढ़ने पर कई शहरों ने nylon/synthetic kite strings पर प्रतिबंध लगा दिया।
ये सिर्फ “खबरें” नहीं — जिंदगियां हैं।
और इन सबकी जड़ — खतरनाक मांझा। Read Full News
सबसे पहले — अगर संभव हो, पतंग न उड़ाएँ
त्योहार मनाइए — लेकिन ऐसे
- बच्चों के साथ खेल,
- दान-पुण्य,
- परिवार के साथ समय,
- प्रकृति-सेवा,
- कम्युनिटी एक्टिविटी
इनसे भी उतनी ही खुशी मिलती है —
और किसी को चोट भी नहीं लगती।
मांझा खरीदते समय इन बातों का सख्ती से ध्यान रखें
1. Chinese/nylon/manja बिल्कुल न लें
यह सबसे खतरनाक होता है —
- पक्षी काट देता है
- गला/चेहरा चीर देता है
- बिजली पकड़ लेता है
अगर दुकान वाला कहे “यह strong है” —
समझिए उतना ही खतरनाक है।
2. हमेशा कॉटन / बायोडिग्रेडेबल धागा चुनें
जो हाथ से टूट सके —
यानी कि जान लेवा न बने।
3. कांच-लेपित (glass coated) धागा बिल्कुल avoid करें
ये razor-blade जैसा काम करता है।
एक सेकंड — और जिंदगी बदल जाती है।
4. पैकेट पर लिखी जानकारी ध्यान से पढ़ें
देखें:
- eco-friendly है या नहीं
- synthetic mention तो नहीं
- स्थानीय प्रशासन की चेतावनी क्या है
5. सस्ता देखकर लोभ में न आएँ
अक्सर खतरनाक धागा सस्ता मिलता है —
और बाद में उसकी कीमत किसी की जान बनती है।
6. अपने इलाके में नियम जानें
कई जगहों पर nylon/manja illegal है।
गलती से भी खरीद लिया — तो जिम्मेदारी आपकी।
7. अतिरिक्त धागा सही तरीके से dispose करें
कभी भी:
- सड़क पर न फेंकें
- छत पर न छोड़ें
- पेड़ों पर न छोड़ें
इसे इकट्ठा करके कट-छांटकर कचरे में सुरक्षित डालें —
ताकि कोई घायल न हो।
पतंग उड़ाते समय ये 10 Safety Rules याद रखें
1. छत के किनारे झुककर खड़े न हों
2. सड़क पर भागकर पतंग न पकड़ें
3. बाइक चलाते समय scarf/helmet का उपयोग करें
4. बिजली के तारों के पास बिल्कुल न जाएँ
5. बच्चों को अकेला न छोड़ें
6. शाम होते ही पतंगबाजी बंद कर दें (पक्षियों की उड़ान का समय)
7. कटी डोर देखकर दौड़ना avoid करें
8. फर्स्ट-एड रखें
9. घायल पक्षी दिखे — rescue helpline पर कॉल करें
10. जीत से ज्यादा ज़िंदगी को महत्व दें
त्योहार की असली जीत — जब कोई घायल न हो
त्योहार हमें खुश रहना सिखाते हैं — निर्दयी बनना नहीं।
अगर हमारी खुशी के कारण:
- कोई पक्षी खून में लथपथ पड़े,
- किसी बच्चे का गला कट जाए,
- कोई बाइक सवार गिरकर हमेशा के लिए घायल हो जाए
तो फिर यह उत्सव नहीं — गलती है।
छोटा-सा संकल्प
“इस साल, हम सुरक्षित त्योहार मनाएँगे —
और किसी की जान को खतरे में नहीं डालेंगे।”
और अगर कभी पतंग उड़ानी भी हो —
जिम्मेदारी, संवेदना और सुरक्षित धागे के साथ।
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