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गणपुर तीर्थ नया अध्याय: बनें पुण्य गाथा के साक्षी


गणपुर तीर्थ अब अपने दर्शन, आध्यात्मिकता और पुण्य यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का स्वागत करने के लिए एक नए अध्याय की ओर बढ़ रहा है। यह तीर्थस्थल, जो अपने शांत और दिव्य वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, अब कई ऐसे अद्भुत बदलाव और विकास कर रहा है, जो यहाँ आने वाले प्रत्येक भक्त को गहरी अनुभूति, आध्यात्मिक ऊर्जा और आत्मिक शांति प्रदान करेंगे।

विशेष रूप से, श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, गणपुर (चिखल्दा) में पूर्व वेदी का भव्य विस्तार होने जा रहा है। इस विस्तार से मंदिर की भव्यता और आध्यात्मिक अनुभव दोनों बढ़ेंगे। नए विकास में पूजा और साधना के लिए अधिक सुव्यवस्थित स्थान, श्रद्धालुओं के लिए आरामदायक सुविधाएँ और तीर्थस्थल की सौंदर्यात्मक संवर्धन शामिल हैं। यह बदलाव न केवल भौतिक संरचना को सुंदर बनाता है, बल्कि श्रद्धालुओं के मन और आत्मा पर भी सकारात्मक प्रभाव डालता है।

गणपुर तीर्थ के इस नए अध्याय का उद्देश्य है कि प्रत्येक आगंतुक को न केवल धार्मिक अनुभव मिले, बल्कि उनके जीवन में शांति, संतुलन और आध्यात्मिक प्रेरणा भी उत्पन्न हो। यह तीर्थस्थल उन सभी के लिए आदर्श स्थल बन गया है, जो अपने जीवन में धर्म, साधना और पुण्य यात्रा के महत्व को समझते हैं और अनुभव करना चाहते हैं।

यह बदलाव एक ऐसा निमंत्रण है, जो सभी को आध्यात्मिक समृद्धि और मानसिक शांति की यात्रा पर आमंत्रित करता है।

गणपुर तीर्थ नया अध्याय: विस्तार से पहले कुछ अहम जानिए

गणपुर मंदिर में पहले से ही श्री पार्श्वनाथ भगवान की परिकर सहित प्रतिमा विराजमान है।
अब उसी वेदी का विस्तार होने जा रहा है, जिसमें संभवतः श्री शांतिनाथ भगवान या श्री महावीर भगवान की एक और परिकर सहित प्रतिमा प्रतिष्ठित की जाएगी। और हाँ, यह केवल मूर्ति स्थापना नहीं, एक पंचकल्याणक की आध्यात्मिक ध्वनि भी है —
क्योंकि प्राण प्रतिष्ठा स्वयं गणपुर में होगी।

Tirth: जब समवशरण होगा दुगुना, पुण्य होगा अनंत

विस्तार के बाद, मूलनायक श्री चंद्रप्रभु भगवान के समवशरण में दो परिकर वाली प्रतिमाएं विराजमान होंगी।
कल्पना कीजिए — वह दृश्य जब एक ही स्थान पर दो जीवंत परिकर, साधकों की आस्था को नए शिखर पर ले जाएंगे।

और यह सब केवल मंदिर का सौंदर्य नहीं बढ़ाएगा, बल्कि क्षेत्र और सम्पूर्ण जैन समाज के लिए सद्भाव, समृद्धि और संयम का कारण बनेगा।

Madhya pradesh: पुण्य कमाने का मौका — जो बार-बार नहीं आता

इस आयोजन में मूर्ति प्रदाता बनने की भावना रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह स्वर्णिम अवसर है।

उक्त परिकर सहित प्रतिमा की राशि मात्र ₹2,81,000/- रखी गई है।

यह वो धन नहीं है जो खर्च होता है —
यह वो पुण्य बीज है जो कर्मों के खेत में मोक्ष के फल उगाता है।

Jain: गणपुर बन रहा है एक आदर्श तीर्थ क्षेत्र

गणपुर क्षेत्र को संपूर्ण तीर्थ सुविधा केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है:

🔸 विशाल संत सदन – अंतिम चरण में
🔸 परिसर वृक्षारोपण – फलदार और ऊँचे वृक्ष
🔸 स्थाई पुजारी व पंडित व्यवस्था
🔸 स्वल्पाहार व भोजन सुविधा (ऑर्डर पर)

एक और दिव्य प्रस्ताव — 24 तीर्थंकर मान स्तम्भ

अगर आपकी भावना और पुण्य दोनों तैयार हों, तो इस पंचकल्याणक में ही प्रस्तावित है:

एक अद्वितीय 24 तीर्थंकर मान स्तम्भ, जिसमें होंगे
24 15 इंच के जिनबिंब —
और हर एक की राशि केवल ₹71,000/- रखी गई है।

कल्पना कीजिए — एक ऐसा स्तम्भ, जो केवल ऊँचा नहीं, आस्था में अडिग होगा।

📞 भाव से जुड़े, संपर्क करें

अगर आपके भीतर ये भावना उठती है — कि “मेरा भी नाम उस स्थान से जुड़ा हो, जहाँ आत्माएं जागती हैं”,
तो आज ही संपर्क करें:

  • ऋषभ डोसी – 📱 94254 50149
  • पदम काला – 📱 90395 07741
  • नवीन जैन – 📱 99264 90365
  • नितिन पाटोदी – 📱 94250 52034
  • रजत पाटोदी – 📱 97131 55555

निवेदक:

श्री चंद्रप्रभु दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर, गणपुर (Ganpur)

तो चलिए, पुण्य की इस संकल्पना को जीवन में साकार करें। गणपुर बुला रहा है।

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