“पिता : क्या एक पापा में होते हैं ये पांचों गुण?”

कौन होते हैं पंचपरमेष्ठी?

“पिता: पंचपरमेष्ठी की तरह जीवन में मार्गदर्शन करते हैं। क्या एक पापा में वास्तव में ये पांचों गुण मौजूद हो सकते हैं? आइए जानते हैं।”जैन धर्म में पंचपरमेष्ठी का अर्थ है — वो पाँच महान आत्माएं, जिनकी हम सबसे ज़्यादा पूजा करते हैं। ये आत्माएं मोक्ष या उच्चतम साधना की अवस्था में होती हैं, और हमें आदर्श जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।

पिता: ये पाँच होते हैं:

  1. अरिहंत (Arihant) – जिन्होंने अपने अंदर के राग-द्वेष को जीत लिया होता है।
  2. सिद्ध (Siddha) – जो मोक्ष प्राप्त कर चुके हैं, पूरी तरह से मुक्त।
  3. आचार्य (Acharya) – जो धर्म-संघ (समाज) का नेतृत्व करते हैं।
  4. उपाध्याय (Upadhyay) – जो हमें जिनवाणी, यानी आत्मज्ञान का उपदेश देते हैं।
  5. साधु (Sadhu) – जो तपस्या और संयम का जीवन जीते हैं।

पिता: क्या हमारे पिता भी इन पंचपरमेष्ठी जैसे होते हैं?

क्या पापा भी वो पांच गुण निभाते हैं – बिना चंदन लगाए, बिना दीक्षा लिए?
उत्तर है – हाँ! और कैसे? आइए समझते हैं।

1️ पिता = अरिहंत जैसा धैर्य और राग-द्वेष से परे प्रेम

अरिहंत वो होते हैं जिन्होंने राग-द्वेष को जीत लिया होता है।
हमारे पापा भी जब अपनी थकान, ग़ुस्सा और परेशानी छुपाकर सिर्फ हमारे चेहरे की मुस्कान देखते हैं —
तो वो राग और द्वेष से ऊपर उठ चुके इंसान होते हैं।

जब हम गलत होते हैं और फिर भी पापा हमें गले लगाते हैं —
तो वो क्षमाशील ‘अरिहंत’ ही तो हैं।

2️ पिता = सिद्ध जैसा त्याग और मौन बल

सिद्ध आत्मा को शरीर की कोई ज़रूरत नहीं होती —और पापा भी वो होते हैं जो अपनी ज़रूरतों को पीछे रखकर बच्चों की ज़रूरतें पहले रखते हैं।

कभी खुद के लिए नया कपड़ा नहीं लिया,
खुद की पसंद छोड़कर बच्चों की पसंद पकाई गई दाल खाई —

यह सब सिद्ध के ही तो गुण हैं — अपरिग्रह (non-attachment) और पूर्ण त्याग।

3️ पिता = आचार्य जैसा मार्गदर्शक और अनुशासन देने वाला

आचार्य समाज को दिशा देने वाले नेता होते हैं,
ठीक वैसे ही पिता पूरे परिवार के लिए निर्णय लेने वाले होते हैं।

🔹 कौनसी राह सही है,
🔹 कब क्या निर्णय लेना है,
🔹 क्या ethical है और क्या नहीं —

ये सब सिखाने वाले हमारे घर के आचार्य — पापा ही तो हैं।

4️ पिता = उपाध्याय जैसा शिक्षा देने वाला, हर गलती पर सिखाने वाला

उपाध्याय जिनवाणी सिखाते हैं —
पापा भी अनुभवों से सिखाते हैं

“सच बोलो, भले नुकसान हो जाए।”
“गलत रास्ता आसान लगता है, पर गड्ढे में ले जाएगा।”

ऐसी हज़ारों बातें पढ़ाई से नहीं, पापा की बातों से आती हैं
जो जीवनभर हमारे साथ चलती हैं।

5️ पिता = साधु जैसा संयम, त्याग और सेवा भाव

साधु किसी से कुछ नहीं मांगते,
केवल सेवा में लगे रहते हैं —
क्या पापा भी कुछ अलग करते हैं?

🔹 सुबह सबसे पहले उठना,
🔹 काम पर जाना,
🔹 घर के हर सदस्य की चिंता करना —

और खुद के आराम का त्याग।
ये साधुत्व नहीं तो और क्या है?

पिता: पंचपरमेष्ठी के गुण सिर्फ मंदिर में नहीं, घर में भी मिलते हैं

जिनकी पूजा हम मंदिर में करते हैं,
उनके गुण अगर घर में कोई निभा रहा है — तो वो हैं हमारे पापा।

वो मुनि नहीं हैं, पर मुनियों जैसा आचरण रखते हैं।
वो मोक्षमार्ग पर नहीं, पर परिवार के लिए स्वर्ग जैसा जीवन बनाते हैं।

Father day quote: आज का युवा क्या सीख सकता है?

✅ पापा से सादगी
✅ पापा से सेवा
✅ पापा से धर्म
✅ पापा से मौन सहनशीलता
✅ और पापा से बिना शोर किए प्रेम करना

आज का युवा अगर सिर्फ इतना भी समझ ले कि “मेरे पापा मेरे पहले पंचपरमेष्ठी हैं”,
तो जिंदगी भर आधा धर्म वहीं पूरा हो जाएगा

निष्कर्ष (Closing Message)

पंचपरमेष्ठी सिर्फ पूजा के पात्र नहीं हैं —वो जीने का तरीका हैं।
और हमारे पिता उस तरीके को हर दिन बिना दिखावे के जीते हैं।

इस Father’s Day पर मंदिर न भी जाओ,
तो कोई बात नहीं।
बस अपने पापा को एक बार गले लगाकर कह दो —

“पापा, आप मेरे पंचपरमेष्ठी हो।”

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